अभ्यास
ध्यान विधि
गुरु सियाग योग में दिव्य मंत्र का मानसिक जप और ध्यान किया जाता है। नियमित अभ्यास से मंत्र अजपा हो जाता है।

अभ्यास एक नज़र में
- दिन में दो बारकम से कम सुबह और शाम
- 15 मिनटहर ध्यान
- मौन जपमन में, होंठ और जीभ स्थिर
- कोई भी स्थानकभी भी, किसी भी दिशा में
- खाली पेटया भोजन के दो घंटे बाद
भाग 1
ध्यान की विधि
ध्यान करने का चरणबद्ध मार्गदर्शन
ध्यान की स्टेप बाई स्टेप विधि:
- आरामदायक स्थिति में बैठ जाइये, आप कहीं भी एवं किसी भी स्थिति में, आलती पालती लगाकर फर्श, कुशन, योग मेट, कारपेट,जमीन, कुर्सी या सोफे पर बैठ सकते हैं| जो बीमार हों या बैठ नहीं सकते हों वे लेटकर ध्यान कर सकते हैं।
- शरीर को ढीला छोड़कर बैठे, शरीर को कसकर या तनकर नहीं बैठना है| अगर बहुत तनकर बैठेंगे तो आपका ध्यान / दिमाग शरीर के थकने वाले हिस्से पर जायेगा| आरामदायक स्थिति में बैठने पर मन शरीर की तरफ नहीं जायेगा|
ध्यान की अवधि
- अपनी आँखे बंद रखें, और गुरुदेव से ध्यान में सहायता के लिए प्रार्थना करें|
- यदि शुरू में समय की समस्या हो तो कुछ दिनों के लिए 15 मिनट का अलार्म लगा सकते हैं|
तीसरी आँख यानि आज्ञाचक्र पर फोकस
- गुरुदेव की फोटो को इतनी देर देखें की, गुरुदेव का चित्र आपको याद रह जाये|
- फिर अपनी आँखे बंद करें और मन ही मन प्रार्थना करे – गुरुदेव, मुझे 15 मिनट ध्यान में सहायता करें|
- फिर आँखें बंद किये किये ही गुरुदेव के चित्र को दोनों भोहों के मध्य (तीसरी आँख) पर सोचें| अर्थात आपको गुरुदेव का चित्र दिमाग़ में सोचना है। उदाहरण के तौर पर आप अपने किसी भी दोस्त या प्रियजन का फोटो मन में सोचिये, तुरंत वो चेहरा आपके मन में आ जाता है। ये चेहरा माथे के अगले हिस्से में कहीं आ जाता है, उसी प्रकार गुरुदेव का चित्र सोचिए|
- गुरुदेव के चित्र को आराम से सोचिये, आँखों को जोर लगाकर अंदर की ओर करने की कोशिश ना करें| आँखे बंद रखते हुए गुरुदेव का चित्र सोचते रहें|
- कुछ दिन के प्रयास के बाद गुरुदेव का फोटो याद रखने में समस्या नहीं होगी।।
- ध्यान के दौरान गुरुदेव का चित्र कुछ समय पश्चात हट जाये तो भी अपना ध्यान भंग ना करें| केवल भोहों के मध्य फोकस करने का प्रयास जारी रखें|
ध्यान के दौरान किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
- शरीर को पूरी तरह से ढीला छोड़ दें, आँखें बन्द रखें चित्र ध्यान में आये या न आये उसकी चिन्ता न करें। मन में आने वाले विचारों की चिन्ता न करते हुए मंत्र का मानसिक जाप करते रहें।
- कम्पन, झुकने, लेटने, रोने, हंसने, तेज रौशनी या रंग दिखाई देने या अन्य कोई आसन, बंध, मुद्रा या प्राणायाम की स्थिति बन सकती है। इन्हें रोकने का प्रयास न करें। ऐसा मातृशक्ति कुण्डलिनी, शारीरिक रोगों को ठीक करने के लिये करवाती है।
- योगिक क्रियाएं या अनुभूतियां न होने पर भी इसे बन्द न करें। रोजाना सुबह-शाम ध्यान करने से कुछ ही दिन बाद फायदे महसूस होना प्रारम्भ हो जाएँगे।
- ध्यान करते समय मंत्र का मानसिक जाप करें तथा जब ध्यान न कर रहे हों तब भी खाते-पीते, उठते-बैठते, नहाते-धोते, पढ़ते-लिखते, कार्यालय आते-जाते, गाड़ी चलाते, अर्थात हर समय ज्यादा से ज्यादा मंत्र का मानसिक जाप करें।
- दैनिक अभ्यास में 15-15 मिनट का ध्यान सुबह-शाम करना चाहिये।
मंत्र जाप
- गुरुदेव का चित्र सोचते हुए, मन ही मन 15 मिनट के लिए गुरुदेव द्वारा दिए गये मंत्र का जाप करते रहें|
- बिना आवाज़ के मन ही मन, बिना जीभ या होंठ हिलाए मानसिक जाप करें|
- मंत्र का स्पष्ट व सही उच्चारण मध्यम गति से मन ही मन करें| बहुत धीमा जप करेंगे तो मन इधर उधर भटकने की सम्भावना रहेगी, और बहुत तेज गति से जाप करने पर शब्दों का उच्चारण गलत हो सकता है|
- इस प्रकार 15 मिनट बाद आप अपने आप ध्यान से बाहर आ जायेंगे|
भाग 2
मंत्र प्राप्त करें
पवित्र मंत्र कैसे प्राप्त करें
- मंत्र वीडियो के लिए यहां क्लिक करें
- WhatsApp नंबर (+91) 7976251916 या 9082747031 पर मन्त्र के लिए मैसेज कीजिये|
- gssyworld@gmail.com पर मंत्र के लिए ईमेल करें
मंत्र की मर्यादा
- मन्त्र केवल और केवल गुरुदेव की आवाज़ में ही सुना जाना चाहिए, किसी को भी मुंह से बोलकर नहीं बताना है| अन्यथा बताने वाले और सुनने वाले दोनों को ही फायदा नहीं होगा|
- WhatsApp पर पहले गुरुदेव के मन्त्र की ऑडियो या वीडियो क्लिप भेजी जाएगी, फिर लिखा हुआ मंत्र दिया जायेगा|
- एक साथ मंत्र सुनने वाले अत्यावश्यक होने पर (मंत्र का उच्चारण समझ ना आने पर) एक दुसरे को मंत्र का उच्चारण समझा सकते हैं ताकि मानसिक उच्चारण स्पष्ट हो|
भाग 3
ध्यान के दौरान विचार
ध्यान के समय विचारों को कैसे संभालें
ध्यान के समय मन में बहुत विचार आते हैं, या जब ध्यान में बैठते हैं तो मन में ऐसे ऐसे विचार आते हैं जो रूटीन में नहीं आते लेकिन ध्यान के समय आते हैं।
- इस बात के लिए कई उत्तर हैं, सबसे पहले जरुरत है इस बात को याद रखने की, कि गुरुदेव ने आपको क्या कहा है? दो बार का ध्यान एवं अधिकतम नाम जप| ध्यान में गुरुदेव का फोटो या दादा गुरुदेव का फोटो सोचिये एवं मन ही मन मानसिक जाप करिए| इसके अलावा गुरुदेव ने ये नहीं कहा कि ये कुछ स्थिर करना है, कुछ रोकने का प्रयास करना है| तो पहला उतर तो यहीं मिल जाता है कि बिना इस बात की चिंता किये की विचार आते हैं या नहीं आते हैं, ये सोचना अपना काम ही नहीं है। अपने को तो सुबह शाम दो बार ध्यान करना है आँखे बन्द करके| जो भी होता है होने दो ।
- पर आप बोलते हैं कि विचार तो रुकने चाहिए, अब इसका उत्तर देखिये- जब आप ध्यान करते हैं तो क्या कान को सुनने से रोक सकते हैं? नहीं रोक सकते। नाक का काम क्या है? सूंघना, उस समय कोई महक आयेगी तो क्या नाक को सूंघने से रोक सकते हैं ? नहीं रोक सकते तो उसी प्रकार मन का काम क्या है? सोचना| तो ये किसने बोला कि मन के विचारों को रोकना है, जब कान को सुनने से नहीं रोक रहे, नाक को सूघने से नहीं रोक रहे तो बिचारे मन ने क्या बिगाड़ा है जो केवल उसे सोचने से रोकना चाहते हो? मन को अपना सोचने का काम करने दो|
- अब रहा सवाल कि गुरुदेव का फोटो हट जाता है एवं मन विचारों में चला जाता है, आपको लगता है कि ध्यान नहीं लग रहा। अब आप कहते हैं कि मन में विचार आ रहे हैं, ध्यान के समय में ऐसे–ऐसे विचार आते हैं जो नार्मल टाइम में नहीं आते। तो अब ये किस बात का संकेत है? इसके लिए आप छोटे छोटे 2-3 उदाहरणों पर गौर कीजिये| ऐसे विचार आना जो रूटीन में नहीं आते यानि अपना मन कहीं अन्दर से ऐसे विचार निकाल के ला रहा है जो सामान्य रूप से नहीं आते। अब इसे एक उदहारण से समझने का प्रयास करते हैं। आप समुद्र में किसी बहुत बड़े बर्फ के टुकड़े को तैरता हुआ देखें| उसका 10% या 15%हिस्सा तो ऊपर दीखता है और बाक़ी पानी में डूबा हुआ रहता है। अब बर्फ का टुकड़ा पानी पर तैर रहा है, तो ऊपर के दीखता हुआ हिस्सा अन्दर पानी में दूबे हुए वाले को तैरा रहा है या अंदर पानी में डूबे हुए हिस्से के कारण ऊपर का हिस्सा गतिमान है। किसकी वजह से कौन तैर रहा है? निश्चित रूप से डूबे हुए हिस्से की गति से ऊपर दीखता हुआ गतिमान हो रहा है क्यों कि 90% पानी में डूबा हुआ जिधर जायेगा, ऊपर का हिस्सा भी उसी तरफ गतिमान होगा| यानी अन्दर के डूबे हुए हिस्से की वजह से ऊपर वाले की गति हो रही है ।
- उसी प्रकार अपने दिमाग में 90% हिस्सा अचेतन एवं 10% चेतन होता है। विज्ञान भी कहता है कि हम अपने दिमाग का 10% भाग का ही उपयोग करते हैं बाकी 90% अचेतन रहता है| तो अपने सारे व्यवहार किस्से नियंत्रित हो रहे है? उस अचेतन मन में भरी हुई चीजों से इसीलिए कई बार हम घटना घटित होने के बाद कहते हैं कि पता नहीं एसा क्या हो गया, कि मुझसे एसा कैसे हो गया ? मेरे ना चाहते हुए भी मेरे मुहं से एसा क्यों निकल गया ? मैं एसा बोलना चाहता था / चाहती थी, पर अनचाहे एसा बोलना निकल गया, आदि आदि तो ये अनियंत्रित विचार कहाँ से आये? वो उस अचेतन मन में से आये जिनके ऊपर अपना नियन्त्रण नहीं है। तो अब इस बात को याद रखियेगा कि अपना नियन्त्रण केवल 10% मन पर है| 90% विचारों पर अपना नियन्त्रण नहीं है।
- अब आप इसी से जुड़े हुए एक और उदाहरण पर गौर करिए। आप ट्रेन में अपने साथी के साथ बैठे हुए बातचीत कर रहे है, आपके आस पास वाले भी अपनी अपनी बातचीत में लगे हैं। कुछ समय बाद आपसे पूछा जाये कि आपके आस पास वाले क्या बातें कर रहे थे? तो आप कहेंगे कि वो तो पता नहीं कि क्या बात कर रहे थे पर बातें जरुर कर रहे थे। आपसे कहा जाये कि आपके कानों में उनकी बातों की आवाज़ नहीं आ रही थी? आप कहेंगे कि आवाज़ भी आ रही थी। फिर आपसे पूछा जाये की जब आवाज़ भी आ रही थी तो बातें क्यों नहीं बता पा रहे हैं? तो आप कहेंगे की चूँकि हम खुद उस समय आपस में बातें कर रहे थे इसलिए नहीं बता पा रहे। यानि जब आप स्वयं बातें कर रहे हैं तो दूसरों की आवाज़ आ रही पर बातें नहीं सुन पा रहे | अब इसी सीन में आप बिना बात किये चुप चाप बैठे हुए हैं, फिर कुछ समय बाद आपसे पूछा जाये कि आसपास वाले क्या बात कर रहे थे ? आप तुरंत बता पाएंगे जैसे सामने वाला मकान की बातें, या पीछे वाले किसी मूवी के बारे में बाते कर रहे थे। यानि अब आसपास वाले जिस बारे में बात कर रहे थे वो आप बता पाएंगे। आपसे पूछा जायेगा कि आप अब कैसे बता पा रहे हैं? आप कहेंगे, क्यों कि मैं चुप था। थी इसलिए उनकी बातें सुनाई पड़ रही थीं| इसका मतलब जब आप चुप या शांत हुए तो आपको आसपास की आवाजें सुनाई पड़ने लग गयीं।
- अब इस घटना से मेडीटेशन को जोड़ के देखें, जब आपने ध्यान शुरू किया तो आपका जो 10% चेतन मन था वो गुरुदेव के फोटो का ध्यान करते ही तुरंत कुण्डलिनी शक्ति के नियन्त्रण में आया और वो 10% मन तुरंत शांत हो गया, जैसे ही वो चेतन मन शांत हुआ, आपके बैकग्राउंड में अचेतन मन में चल रहे विचार, जो 24 घंटे चलते रहते हैं वो आपको सुनाई पड़ने लगते हैं| यो ही ध्यान में दिखने लगे ।
- अब आपका प्रश्न बिलकुल सिम्पल हो गया, आपको तो लग रहा है कि मेरा ध्यान नहीं लग रहा, जबकि हो क्या रहा है, ध्यान आपका लग रहा है पर वो 10% चेतन मन गुरुदेव की शक्ति के द्वारा तुरंत नियन्त्रण में ले लिया गया। बाकी 90%अचेतन मन में चलते हुए (अनियंत्रित) विचार सामने आ गए| तो सब एकदम सरल हो गया | ध्यान आपका लग रहा है पर आपको लग रहा है कि आपका ध्यान नहीं लग रहा। ये इस बात का प्रमुख उत्तर है कि आप इस बात की चिंता ना करें कि आपका ध्यान नहीं लग रहा है, ये शक्ति है वो अपने नियन्त्रण में लेती है।
- अब प्रश्न ये भी आता है कि ध्यान लगता है पर विचार आते हैं। एक पक्ष कहता है कि उन विचारों को शांत करना है। जैसे आप एक पानी के गिलास में मिट्टी डालिए, उसे चम्मच से हिलाइए। पानी हिलाते ही मिट्टी हिल रही है, थोड़ी देर बाद आप देखेंगे कि मिट्टी शांत होकर पेंदे में सेटल हो जाती है। अब गिलास का पानी साफ दिखने लगा, तो क्या मिट्टी उस गिलास से बाहर निकल गयी? मिट्टी तो अभी भी उसी गिलास में ही है। लेकिन पानी फिर भी साफ़ हो गया। यदि गिलास का पानी कोई बाहर से हिला दे तो पूरा पानी थोड़ी देर के लिए फिर गंदा सा दिखने लगता है, इसी प्रकार कई बार किसी के कारण या पुराना विचार आने के कारण अंदर एक विचारों की श्रृंखला चल पड़ती है और अचेतन मन के विचार कुछ समय के लिए पुनः ध्यान में दिखने लगते हैं| कुछ समय पश्चात ये विचार रहेंगे तो आपके अवचेतन मन में, पर आप शांत रहेंगे|
- जैस किसी प्रियजन की मृत्यु या कोई बहुत ही ख़ुशी की घटना (शादी, बच्चा, मकान, नौकरी, प्रमोशन आदि) बार बार याद नहीं आती लेकिन रहती हमेशा अपने अंदर ही है| जो शांत होते ही या ध्यान के समय अचानक ही विचारों में उठ सकती है| बाक़ी काम के समय विचारों में नहीं आती|
- तो ये गुरु सियाग का ध्यान अभी प्रारम्भिक अवस्था में आपको एकदम विचार शुन्यता की अवस्था में नहीं लायेगा| विचार शुन्यता समाधि की स्तिथि में होगी। लेकिन फिलहाल अपन चाहते हैं कि अपना मन शांत होना चाहिए। ये ध्यान अपने मन को शांत करने का तरीका है। विचार अचेतन मन में ही पड़े रहेंगे पर मन शांत रहेगा| जैसे मिट्टी गिलास में ही है बाहर नहीं गयी पर पानी का गिलास साफ दिख रहा है। इस प्रकार मन शांत ही जायेगा जो अपनी ध्यान आरम्भ करने की सबसे बड़ी उपलब्धी है| कि अपन सबसे पहले शांति तो पायें। शांति पाएंगे तो दूसरी चीजें भी पाएंगे। उस पानी को निथार भी पाएंगे और पूरा गिलास मिट्टी रहित भी बना पाएंगे। लेकिन पहले शांत तो हों। इसलिए आप ये चिंता छोड़ दीजिये कि आपका ध्यान लग रहा है या नहीं। आप तो बस दो बार सुबह शाम नियमित ध्यान कीजिये।
हमसे पूछें
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